machhro se bachav kese kare

  मच्छरों से बचने के घरेलू उपाय मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया से बचाव और मच्छरों की रोकथाम के उपाय नमस्कार दोस्तो Acchi Hindi Me  Blog में आपका स्वागत है         मानव जात ने आधुनिक यूग में कई आविष्कार किये है ।कई बीमारियों की वैक्सीन सफलता पूर्वक बनाकर उस बीमारी से निजात पाया है ।कई रोग बीमारी को नेस्त नाबूद कर दिया है ।जैसे के पोलियो, चिकन पॉक्स आदि । मनुष्य ने मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों खासकर मलेरिया,डेंगू की रोकधाम के लिए कई संशोधन किया पर मलेरिया की दवाई बनाने और थोडी बहुत रोकधाम कंट्रोल कर पाया है।पर मच्छरों से निजात पाने में नाकामयाब रहा है।मच्छरों से सिर्फ अपनी सावधानियों से ही बच सकते है।मलेरिया, डेंगू जैसे मच्छरों से फैल ने वाली बीमारियों से बच सकते है । आज हम इस article में मच्छरों से कैसे बचाव कर सकते है उसके बारे में Jankari लेंगे। हम मच्छरों से कैसे बच सकते है ? हम यहां मच्छरों से बचाव के लिए Tricks उपाय बताते है ।  1.  मच्छर आमतौर पर सुबह और  शाम के अंधेरे में आवाजाही करते है इसीलिये उस वक़्त खिडकी दरवाजे बंद रखे । 2.  खिड...

Gajanan Ganpati ki Puja archana

Shri Gajanan Ganpati ki puja कैसे की जाती है

हिंदुस्तान भारत में गणपति बप्पा स्तूती
Ganpati Vandana

           गुजरात में मंगल कार्य श्री गजानन गणपति की पूजा से शुरू किया जाता है।
            जब कोई धार्मिक आयोजन या कार्यक्रम, सामाजिक या हमारा अपना शुभ अवसर होता है, तो श्री गजानन गणपति की पूजा से शुभ काम शुरू करते हैं।
         जब शादी का आयोजन किया जाता है और चोरी रची जाती है या बेटा और बेटी कीमंगनी का अवसर मनाया जाता है, तो सबसे पहले उमा महेश्वर पुत्र श्री गणेश की पूजा की जाती है।
          विवाह के अवसर पर, पहले गणपति स्थापित किया जाता है जिसमें पांच प्रकारक के अनाज एक सजावटी लकड़ी की bajoth पर padharaye जाते हैं, चावल , मग के पांच ढेर बनाई जाती हैं। इसके ऊपर लकड़ी की श्री गणपति की एक छोटी मूर्ति स्थापित की जाती  है।
      गणेशजी की मूर्ति की स्थापना से पहले, मूर्ति को पंचामृत में स्नान कराया जाता है: दूध, दही, घी, शहद और गंगा जल उसमें सामिल है। गणेशजी को वस्त्र के रूप में, एक छोटे धागे को पहनाया जाता है।
     मूर्ति की स्थापना के बाद, आसन पर दो सुपारी श्री गणेशजी की सनमुख ऋद्धि सिद्धि के रूप में रखी जाती है। फिर केले, अनार, सेब, चिकू जैसे फलों को रखा जाता है। शास्त्री गोरमहाराज के जाप मंत्रोच्चार के साथ गुलाल कंकू चावल से गणेशजी की पूजा की जाती है। जो युगल पूजा में बैठते हैं उन्हें स्नान से पवित्र होकर पूजा में बैठना होता है।
          ब्राह्मण शास्त्री ऐसे कुछ छंदों के साथ अपनी पूजा शुरू करते है, 

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"वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि सम्प्रभा,
निर्विघ्ने कुरुमे देव सर्व कार्येषु सर्वदा "

Shri Ganeshaya Namah,Lord Ganesh विघ्नहर्ता भगवान गणेश। गणेश चतुर्थी के त्योहार में बप्पा की मूर्ती बनाई जाती है। गणपति बप्पा मोरिया। जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

         जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

      इस प्रकार हर शुभारंभ मे श्री गणपति की पूजा की जाती है। गणेश जी के घी के दीपक औऱ अगरबत्ती से पूजन किया जाता है ।जब खेती जैसे कुछ अच्छे काम की शुरुआत होती है, जब मकान की नींव रखीजाती है तब गणेशजी की प्रथम प्रार्थना की जाती है। श्री गणेश विघ्नहर्ता के देवता हैं, इसलिए उन्हें विघ्नविनाशक भी कहा जाता है। गणपति की पूजा से शुरू किए गए काम अच्छी तरह पूर्ण होते है।
     महाराष्ट्र में गणेशजी की पूजा का विशेष महत्व है। गणेश चतुर्थी के त्योहार में, गली और मोहल्ले में गणेशजी का पंडाल बनाया जाता है। लालबाग के पंडाल की दुनिया में प्रशंसा की जाती है, इसलिए गणेशजी को लालबाग चा राजा के रूप में जाना जाता है। अब गुजरात में भी श्री गणेश का पंडाल बनाया जाता है। त्योहार के अंत में, गणेशजी की प्रतिमा को समुद्री,झील या नदी में विसर्जित किया जाता है।
       श्री गणेश की स्तुति का कोई पार नहीं है। जय श्री गणेश
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